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दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन एक अनवरत संघर्ष,

📅 प्रकाशित: February 21, 2026 | ✍️ लेखक: Jhnama Team

रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासियों के सर्वमान्य नेता, दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के उपरांत उनके पैतृक गांव नेमरा में आयोजित श्राद्ध भोज में लाखों की संख्या में लोगों का उमड़ना एक ऐतिहासिक घटना थी। भोर से ही नेमरा में लोगों का तांता लगना शुरू हो गया था और यह जनसैलाब उनके प्रति झारखंड की जनता के अगाध प्रेम, सम्मान और असीम श्रद्धा का प्रमाण था।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन एक अनवरत संघर्ष,

एक योद्धा का उद्भव: त्रासदी से संघर्ष तक

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी, 1944 को तत्कालीन बिहार के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता शोभाराम सोरेन एक शिक्षक थे और उनकी माता सोनामुनी सोरेन थीं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने गोला हाई स्कूल, हजारीबाग में प्राप्त की, लेकिन पिता की हत्या और परिवार की आर्थिक तंगी के कारण वे दसवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।

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